दशहरा /
Dasehra |
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अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध हिन्दुओं का प्रमुख धार्मिक त्यौहार दशहरा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है. यह त्यौहार सम्पूर्ण भारतवर्ष में परंपरागत रूप से उत्साह और धार्मिक निष्ठा के साथ मनाया जाता है. पौराणिक शास्त्रों में वर्णित कथाओं के अनुसार दशहरा के दिन ही भगवान श्रीराम ने रावण को मार कर असत्य पर सत्य का विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे, जिस कारण इस पवित्र पर्व को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है. नौ दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार में जगह-जगह रामलीला का मंचन होता है, जिसमें मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन-चरित्र की झांकियां प्रस्तुत की जाती है. विजयादशमी के दिन नीलकंठ पक्षी को देखना शुभ होता है. भक्तगणों में मान्यता है कि इस दिन इस पक्षी के दर्शन से भगवान शिव के विषपान रूप के दर्शन का फल प्राप्त होता है.
विजयादशमी के साथ यूं तो कई ऐतिहासिक प्रसंग प्रचलित हैं लेकिन सबसे पुराना प्रसंग भगवती मां दुर्गा के साथ जुड़ा है. ऐसी मान्यता है कि जब सभी देवतागण अत्याचारी राक्षस महिषासुर से पराजित हो गए, तब इसी दिन मां दुर्गा ने चंडी का रूप धारण कर उस महापापी का वध किया था. इस पवित्र पर्व के अंतिम दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा का जुलूस निकला जाता है और पास के नदी में उनका विसर्जन किया जाता है, इस अवसर पर महिलाएं देवी के माथे पर सिंदूर लगाती है और उसके बाद खुद एक-दूसरे के माथे पर सिन्दूर लगाते हुए शुभो विजया की बधाई देती हैं.
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