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रक्षाबंधन / Rakshabandhan


रक्षाबन्धन 24 अगस्त, 2010 को दिन मंगलवार को है| राखी बान्धने क शुभ समय सुबह 9.23 के बाद कभी भी है|
हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण पूर्णिमा के दिन भद्रकाल हो तो राखी नहीं बांधनी चाहिए. कथानुसार रावण ने इसी काल में सूर्पनखा से राखी बंधवाई और उसके एक साल में ही कुल सहित उसका नाश हो गया.
हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पवित्र त्यौहार मनाया जाता है. इस त्यौहार से भाई-बहन का एक-दूसरे के प्रति परस्पर स्नेह, प्यार और अटूट विश्वास झलकता है. इस दिन प्यारी बहन अपने भाई की कलाई पर रेशम के धागों की पवित्र डोर बांधती है, उसके माथे पर तिलक लगाती है और उसकी दीर्घायु और प्रसन्नता के लिए ईश्वर से कामना करती है. भाई भी इस पवित्र बंधन के मौके पर अपनी बहन को हर परिस्थिति में यथा संभव उसकी रक्षा करने की प्रतिज्ञा कर अमूल्य उपहार देता है.
हिन्दू पुराण में वर्णित कथाओं के अनुसार एक बार पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण की कलाई से बहते खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर बांधा और इस प्रकार उनके बीच भाई-बहन का पवित्र रिश्ता कायम हुआ था. श्रीकृष्ण ने भी द्रौपदी को रक्षा करने का वचन दिया और चीर हरण के समय उनकी लाज बचाई. ऐसा विश्वास किया जाता है कि तभी से हिन्दू समाज में रेशमी धागों के पवित्र बंधन का त्यौहार रक्षाबंधन आरम्भ हुआ.