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शारदीय नवरात्र / Shardiya Navratra


आदिशक्ति मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है. आश्विन शुक्लपक्ष प्रथमा को कलश की स्थापना के साथ ही भक्तों की आस्था का प्रमुख त्यौहार शारदीय नवरात्र आरम्भ हो जाता है. नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में मां भगवती के नौ रूपों क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री देवी की पूजा की जाती है. यह महापर्व सम्पूर्ण भारत में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इन दिनों भक्तों को प्रातः काल स्नानादि क्रियाओं से निवृत्त होकर निष्कामपरक संकल्प कर पूजा स्थान को गोमय से लीपकर पवित्र कर लेना चाहिए और फिर षोडशोपचार विधि से माता के स्वरूपों की पूजा करना चाहिए. पूजा करने के उपरान्त इस मंत्र द्वारा माता की प्रार्थना करना चाहिए-

विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमांश्रियम्| रूपंदेहि जयंदेहि यशोदेहि द्विषोजहि||

पौराणिक कथानुसार महाराक्षस रावण का वध करने के लिए भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने शारदीय नवरात्र का व्रत किया था और तभी जाकर उन्हें विजयश्री की प्राप्ति हुई थी. आस्थावान भक्तों में मान्यता है कि नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करने वाले पर से नवग्रहों के प्रकोप शांत हो जाता है और जीवन में उसे सुख, शांति, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है.